कैग रिपोर्ट: बिहार की उच्च शिक्षा का बुरा हाल
शिक्षकों की भारी कमी
कैग (CAG) की रिपोर्ट में बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 विश्वविद्यालयों की जांच में पाया गया कि शिक्षकों के 57% पद खाली पड़े हैं। यह कमी कुछ विश्वविद्यालयों में 49% तो कुछ में 86% तक है। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
बजट तो आया, लेकिन खर्च नहीं हुआ
बिहार सरकार ने उच्च शिक्षा के लिए 2017 से 2022 के बीच ₹22,576.33 करोड़ का बजट तय किया था। लेकिन इसमें से सिर्फ ₹18,442.32 करोड़** ही खर्च हो पाया, यानी 18% पैसा बिना उपयोग के रह गया। इसका मतलब साफ है कि सरकार के पास पैसे तो थे, लेकिन उनका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया।
वेतन में गड़बड़ी
कैग रिपोर्ट में बताया गया कि कई विश्वविद्यालयों में बिना उचित सत्यापन के ही शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन दे दिया गया। पांच विश्वविद्यालयों में वेतन सत्यापन सेल के बिना ही ₹48.28 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। वहीं, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में सातवें वेतन आयोग के बकाया के रूप में ₹14.41 करोड़ का भुगतान हुआ, जिसमें ₹4.32 करोड़ टैक्स काटे बिना ही दे दिए गए।
छात्रों की परेशानी: परीक्षा परिणाम में देरी
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 2017-18 से 2022 के बीच बिहार के विश्वविद्यालयों में परीक्षा के परिणाम तय समय (60 दिन) के बजाय 4 से 946 दिनों की देरी से घोषित किए गए। इससे छात्रों को आगे की पढ़ाई और नौकरियों के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) का फंड नहीं मिला
जिन 11 विश्वविद्यालयों की जांच हुई, उनमें कई को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से मिलने वाली ₹27.82 करोड़ की ग्रांट की अगली किश्त नहीं मिल पाई। कारण यह था कि पहले मिले पैसे का सही उपयोग नहीं किया गया था।
गैर-शैक्षणिक पद भी खाली
रिपोर्ट के अनुसार, केवल शिक्षकों की ही नहीं बल्कि गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के 56% पद भी खाली पड़े हैं। इसका असर प्रशासनिक कार्यों पर पड़ रहा है, जिससे छात्रों को डॉक्यूमेंट्स, एडमिशन और परीक्षा संबंधी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कैग की रिपोर्ट से साफ है कि बिहार में उच्च शिक्षा की हालत बहुत खराब है। शिक्षकों की भारी कमी, बजट का सही इस्तेमाल न होना, वेतन में गड़बड़ी और परीक्षा परिणाम में देरी जैसी समस्याओं ने छात्रों का भविष्य खतरे में डाल दिया है। सरकार को जल्द से जल्द इन समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए, वरना बिहार की शिक्षा व्यवस्था और ज्यादा बिगड़ सकती है।
